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ramayan 5.26.42: या तो मुझमें कुछ दुर्गुण हैं अथवा मेरा भाग्य फूट गया है, जिसके कारण इस समय मैं अभिमानी सीता अपने परम पूज्य पति श्री रामजी से वियोग में हूँ॥ 42॥   |   ramayan सर्ग 5.26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.26.42 
किं वा मय्यगुणा: केचित् किं वा भाग्यक्षयो हि मे।
या हि सीता वरार्हेण हीना रामेण भामिनी॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
या तो मुझमें कुछ दुर्गुण हैं अथवा मेरा भाग्य फूट गया है, जिसके कारण इस समय मैं अभिमानी सीता अपने परम पूज्य पति श्री रामजी से वियोग में हूँ॥ 42॥
 
Either I have some bad qualities or my luck has run out, due to which at this time I, proud Sita, am separated from my most revered husband, Shri Ram.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)