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ramayan 5.26.4: अब मैं राक्षसियों के वश में हूँ और उनकी कठोर धमकियाँ सुनता और सहता हूँ। ऐसी स्थिति में मैं अत्यन्त दुःख से व्याकुल और चिन्तित होकर जीवित नहीं रह सकता॥4॥   |   ramayan सर्ग 5.26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.26.4 
राक्षसीवशमापन्ना भर्त्स्यमाना च दारुणम्।
चिन्तयन्ती सुदु:खार्ता नाहं जीवितुमुत्सहे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अब मैं राक्षसियों के वश में हूँ और उनकी कठोर धमकियाँ सुनता और सहता हूँ। ऐसी स्थिति में मैं अत्यन्त दुःख से व्याकुल और चिन्तित होकर जीवित नहीं रह सकता॥4॥
 
‘Now I am under the control of the demonesses and I listen to and endure their harsh threats. In such a condition, I cannot remain alive, being distressed and worried with great pain.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)