श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.26.35 
ध्रुवं मां प्रातराशार्थं राक्षस: कल्पयिष्यति।
साहं कथं करिष्यामि तं विना प्रियदर्शनम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वह राक्षस अपनी क्षुधा शान्त करने के लिए अवश्य ही मेरे शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर देगा। उस समय मैं, जो अबला स्त्री है, अपने प्रिय पति के बिना क्या करूँगी?॥ 35॥
 
That demon will surely cut my body into pieces to satisfy his hunger. What will I, a helpless woman, do at that time without my beloved husband?॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)