श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.26.34 
अधर्मात् तु महोत्पातो भविष्यति हि साम्प्रतम्।
नैते धर्मं विजानन्ति राक्षसा: पिशिताशना:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'इस समय अधर्म से बड़ा उत्पात मचने वाला है। ये मांसभक्षी राक्षस धर्म को जानते ही नहीं।
 
‘At this time, a great havoc is going to be caused by unrighteousness. These carnivorous demons do not know religion at all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)