श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.26.28 
पुण्योत्सवसमृद्धा च नष्टभर्त्री सराक्षसा।
भविष्यति पुरी लङ्का नष्टभर्त्री यथांगना॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जिस लंका में आज पुण्य उत्सव हो रहे हैं, वह राक्षसों सहित अपने स्वामी के नष्ट हो जाने पर विधवा के समान दरिद्र हो जाएगी॥ 28॥
 
The Lanka where holy festivals are being held today will become destitute like a widow after the destruction of its lord along with the demons.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)