vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना
»
श्लोक 28
श्लोक
5.26.28
पुण्योत्सवसमृद्धा च नष्टभर्त्री सराक्षसा।
भविष्यति पुरी लङ्का नष्टभर्त्री यथांगना॥ २८॥
अनुवाद
जिस लंका में आज पुण्य उत्सव हो रहे हैं, वह राक्षसों सहित अपने स्वामी के नष्ट हो जाने पर विधवा के समान दरिद्र हो जाएगी॥ 28॥
The Lanka where holy festivals are being held today will become destitute like a widow after the destruction of its lord along with the demons.॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×