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ramayan 5.26.22: ‘तब तो प्रत्येक घर में राक्षसियाँ अपने पतियों के मर जाने पर निःसंदेह उसी प्रकार रोतीं, जैसे मैं आज रो रही हूँ॥ 22॥   |   ramayan सर्ग 5.26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.26.22 
ततो निहतनाथानां राक्षसीनां गृहे गृहे।
यथाहमेवं रुदती तथा भूयो न संशय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘तब तो प्रत्येक घर में राक्षसियाँ अपने पतियों के मर जाने पर निःसंदेह उसी प्रकार रोतीं, जैसे मैं आज रो रही हूँ॥ 22॥
 
‘Then, after the death of their husbands, the demonesses in every house would have undoubtedly wept in the same way as I am crying today.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)