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ramayan 5.26.14: जिन श्री राम ने दण्डकारण्य के अन्दर युद्ध में राक्षस-मुखधारी विराध का वध किया था, वे मेरी रक्षा के लिए यहाँ क्यों नहीं आ रहे हैं?’ 14॥   |   ramayan सर्ग 5.26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.26.14 
विराधो दण्डकारण्ये येन राक्षसपुंगव:।
रणे रामेण निहत: स मां किं नाभिपद्यते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जिन श्री राम ने दण्डकारण्य के अन्दर युद्ध में राक्षस-मुखधारी विराध का वध किया था, वे मेरी रक्षा के लिए यहाँ क्यों नहीं आ रहे हैं?’ 14॥
 
Why is Shri Ram, who had killed the demon-headed Viradha in the battle inside Dandakaranya, not coming here to protect me?' 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)