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सर्ग 26: सीता का करुण-विलाप तथा अपने प्राणों को त्याग देने का निश्चय करना
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श्लोक 14
श्लोक
5.26.14
विराधो दण्डकारण्ये येन राक्षसपुंगव:।
रणे रामेण निहत: स मां किं नाभिपद्यते॥ १४॥
अनुवाद
जिन श्री राम ने दण्डकारण्य के अन्दर युद्ध में राक्षस-मुखधारी विराध का वध किया था, वे मेरी रक्षा के लिए यहाँ क्यों नहीं आ रहे हैं?’ 14॥
Why is Shri Ram, who had killed the demon-headed Viradha in the battle inside Dandakaranya, not coming here to protect me?' 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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