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ramayan 5.25.9: उस समय सीता की विशाल और मोटी चोटी भी काँप रही थी, जिससे वह रेंगती हुई सर्पिणी के समान प्रतीत हो रही थी॥9॥   |   ramayan सर्ग 5.25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.25.9 
तस्या: सा दीर्घबहुला वेपन्त्या: सीतया तदा।
ददृशे कम्पिता वेणी व्यालीव परिसर्पती॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस समय सीता की विशाल और मोटी चोटी भी काँप रही थी, जिससे वह रेंगती हुई सर्पिणी के समान प्रतीत हो रही थी॥9॥
 
At that time, Sita's huge and thick braid was also trembling and so she appeared like a crawling serpent.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)