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ramayan 5.25.8: राक्षसों से भयभीत होकर वह तेज हवा से हिले हुए केले के वृक्ष के समान भूमि पर गिर पड़ी। उस समय उसके मुख की कान्ति लुप्त हो गई थी। ॥8॥   |   ramayan सर्ग 5.25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.25.8 
सा वेपमाना पतिता प्रवाते कदली यथा।
राक्षसीनां भयत्रस्ता विवर्णवदनाभवत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राक्षसों से भयभीत होकर वह तेज हवा से हिले हुए केले के वृक्ष के समान भूमि पर गिर पड़ी। उस समय उसके मुख की कान्ति लुप्त हो गई थी। ॥8॥
 
Frightened by the demons, she fell on the ground like a banana tree shaken by a strong wind. At that time, the glow on her face had faded. ॥8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)