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श्लोक  5.25.6 
सा त्वशोकस्य विपुलां शाखामालम्ब्य पुष्पिताम्।
चिन्तयामास शोकेन भर्तारं भग्नमानसा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उसकी इच्छा पूरी नहीं हुई। निराश होकर उसने अशोक वृक्ष की एक विशाल शाखा का सहारा लिया और दुःखी होकर अपने पति के बारे में सोचने लगी।
 
Her wish was shattered. Disheartened, she took support of a huge branch of the Ashoka tree and started thinking about her husband in grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)