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ramayan 5.25.2: उन राक्षसों की इस प्रकार बातें सुनकर बुद्धिमान विदेह राजकुमारी सीता अत्यन्त भयभीत हो गईं और नेत्रों से आँसू बहाते हुए रुँधे हुए स्वर में बोलीं-॥2॥   |   ramayan सर्ग 5.25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.25.2 
एवमुक्ता तु वैदेही राक्षसीभिर्मनस्विनी।
उवाच परमत्रस्ता बाष्पगद‍्गदया गिरा॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन राक्षसों की इस प्रकार बातें सुनकर बुद्धिमान विदेह राजकुमारी सीता अत्यन्त भयभीत हो गईं और नेत्रों से आँसू बहाते हुए रुँधे हुए स्वर में बोलीं-॥2॥
 
On hearing these demons speak in this manner, the wise Videha princess Sita became very frightened and spoke in a choked voice with tears flowing from her eyes -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)