Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.25.16: जो मेरे प्रियतम को देख पाते हैं, वे धन्य हैं, जो सिंह के समान वीर हैं, सिंह की सी चाल वाले हैं, कमल-नेत्रों वाले हैं, कृतज्ञ और प्रेममय हृदय वाले हैं॥16॥ | ramayan सर्ग 5.25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं पद्मदलपत्राक्षं सिंहविक्रान्तगामिनम्।
धन्या: पश्यन्ति मे नाथं कृतज्ञं प्रियवादिनम्॥ १६॥
अनुवाद
जो मेरे प्रियतम को देख पाते हैं, वे धन्य हैं, जो सिंह के समान वीर हैं, सिंह की सी चाल वाले हैं, कमल-नेत्रों वाले हैं, कृतज्ञ और प्रेममय हृदय वाले हैं॥16॥
‘Blessed are those who are able to see my beloved, who is as brave as a lion, has the gait of a lion, has lotus-eyed, grateful and loving heart,॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥