श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.25.15 
भर्तारं तमपश्यन्ती राक्षसीवशमागता।
सीदामि खलु शोकेन कूलं तोयहतं यथा॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने पतिदेव को नहीं देख पाती हूँ। मैं इन राक्षसियों के चंगुल में फँसी हुई हूँ और शोक से ऐसी दुर्बल हो रही हूँ जैसे जल की लहरों से कटी हुई नदी की धार॥15॥
 
‘I am not able to see my husband. I am trapped in the clutches of these demonesses and I am becoming weak with grief like the banks of a river being cut by the waves of water.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)