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ramayan 5.25.14: ‘मैंने पूर्वजन्म में बहुत कम पुण्य कर्म किए थे, इसलिए इस दुःखद स्थिति में पड़कर मैं अनाथ की तरह मरूँगा। जैसे माल से भरी नाव वायु के वेग से समुद्र में डूब जाती है, वैसे ही मैं भी नष्ट हो जाऊँगा।॥14॥   |   ramayan सर्ग 5.25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.25.14 
एषाल्पपुण्या कृपणा विनशिष्याम्यनाथवत्।
समुद्रमध्ये नौ: पूर्णा वायुवेगैरिवाहता॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘मैंने पूर्वजन्म में बहुत कम पुण्य कर्म किए थे, इसलिए इस दुःखद स्थिति में पड़कर मैं अनाथ की तरह मरूँगा। जैसे माल से भरी नाव वायु के वेग से समुद्र में डूब जाती है, वैसे ही मैं भी नष्ट हो जाऊँगा।॥14॥
 
‘I had done very few good deeds in my previous life, that is why I will die like an orphan after falling into this miserable condition. Just like a boat full of goods sinks in the sea due to the force of wind, I will also be destroyed in the same way.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)