श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.25.12 
लोकप्रवाद: सत्योऽयं पण्डितै: समुदाहृत:।
अकाले दुर्लभो मृत्यु: स्त्रिया वा पुरुषस्य वा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हाय! विद्वानों ने यह कहावत ठीक ही कही है कि 'किसी भी स्त्री या पुरुष की मृत्यु बिना समय के नहीं होती।'॥12॥
 
Alas! The scholars have rightly said this proverb that 'the death of any man or woman does not happen without the right time.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)