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ramayan 5.25.11: हे राम! हे लक्ष्मण! हे मेरी सास कौशल्या! हे मेरी प्रिय सुमित्रे!' ऐसा बार-बार कहते हुए सीता दुःख से पीड़ित होकर रोने और सिसकने लगीं।   |   ramayan सर्ग 5.25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.25.11 
हा रामेति च दु:खार्ता हा पुनर्लक्ष्मणेति च।
हा श्वश्रूर्मम कौसल्ये हा सुमित्रेति भामिनी॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे राम! हे लक्ष्मण! हे मेरी सास कौशल्या! हे मेरी प्रिय सुमित्रे!' ऐसा बार-बार कहते हुए सीता दुःख से पीड़ित होकर रोने और सिसकने लगीं।
 
Oh Rama! Oh Lakshmana! Oh my mother-in-law Kausalye! Oh my dear Sumitre!' Saying this repeatedly, Sita, afflicted with grief, began to weep and sob.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)