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ramayan 5.25.1: जब वे क्रूर राक्षसियाँ इस प्रकार की अनेक कठोर और क्रूर बातें कह रही थीं, तब जनकननदिनी सीता अधीर होकर विलाप कर रही थीं ॥1॥   |   ramayan सर्ग 5.25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 25: राक्षसियों की बात मानने से इनकार करके शोक-संतप्त सीता का विलाप करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.25.1 
अथ तासां वदन्तीनां परुषं दारुणं बहु।
राक्षसीनामसौम्यानां रुरोद जनकात्मजा॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब वे क्रूर राक्षसियाँ इस प्रकार की अनेक कठोर और क्रूर बातें कह रही थीं, तब जनकननदिनी सीता अधीर होकर विलाप कर रही थीं ॥1॥
 
When those cruel demonesses were saying many harsh and cruel things like these, Janakanandini Sita was crying impatiently. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)