Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.24.9: ‘चाहे मेरा पति दरिद्र हो अथवा राज्यहीन हो, वे मेरे स्वामी हैं, वे मेरे गुरु हैं, मैं सदैव उन्हीं पर समर्पित हूँ और रहूँगी, जैसे सुवर्चला सूर्य पर समर्पित है॥9॥ | ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दीनो वा राज्यहीनो वा यो मे भर्ता स मे गुरु:।
तं नित्यमनुरक्तास्मि यथा सूर्यं सुवर्चला॥ ९॥
अनुवाद
‘चाहे मेरा पति दरिद्र हो अथवा राज्यहीन हो, वे मेरे स्वामी हैं, वे मेरे गुरु हैं, मैं सदैव उन्हीं पर समर्पित हूँ और रहूँगी, जैसे सुवर्चला सूर्य पर समर्पित है॥9॥
‘Whether my husband is poor or without a kingdom, he is my master, he is my Guru, I am and will always be devoted to him, just as Suvarchala is devoted to the Sun.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥