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ramayan 5.24.7: ‘आप सब लोग मेरे सामने समाज के विरुद्ध यह प्रस्ताव रख रहे हैं; आपका यह पापपूर्ण कथन मेरे हृदय में एक क्षण भी नहीं ठहर सकता।   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.24.7 
यदिदं लोकविद्विष्टमुदाहरत संगता:।
नैतन्मनसि वाक्यं मे किल्बिषं प्रतितिष्ठति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘आप सब लोग मेरे सामने समाज के विरुद्ध यह प्रस्ताव रख रहे हैं; आपका यह पापपूर्ण कथन मेरे हृदय में एक क्षण भी नहीं ठहर सकता।
 
‘You all are making this proposal against the society to me; this sinful statement of yours cannot stay in my heart even for a moment. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)