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ramayan 5.24.45-47h: तत्पश्चात राक्षसी शूर्पणखा बोली, "अजमुखी ने जो कहा है, वह मुझे भी अच्छा लग रहा है। जल्दी से वह मदिरा लाओ जो सभी दुखों का नाश करती है। उससे मानव मांस का स्वाद लेकर हम देवी निकुंभिला के सामने नृत्य करेंगी।"   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.24.45-47h 
तत: शूर्पणखा नाम राक्षसी वाक्यमब्रवीत्॥ ४५॥
अजामुख्या यदुक्तं वै तदेव मम रोचते।
सुरा चानीयतां क्षिप्रं सर्वशोकविनाशिनी॥ ४६॥
मानुषं मांसमास्वाद्य नृत्यामोऽथ निकुम्भिलाम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात राक्षसी शूर्पणखा बोली, "अजमुखी ने जो कहा है, वह मुझे भी अच्छा लग रहा है। जल्दी से वह मदिरा लाओ जो सभी दुखों का नाश करती है। उससे मानव मांस का स्वाद लेकर हम देवी निकुंभिला के सामने नृत्य करेंगी।"
 
Thereafter the demoness Shurpanakha said, 'What Ajamukhi has said is also pleasing to me. Quickly bring the wine which destroys all sorrows. After tasting human flesh with it, we will dance in front of the goddess Nikumbhila.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)