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ramayan 5.24.43-45h: तत्पश्चात् राक्षसी अजामुखी बोली, 'मुझे व्यर्थ का विवाद पसंद नहीं। आओ, पहले हम इसके कई टुकड़े कर लें। सभी टुकड़े समान आकार और भार के होने चाहिए। फिर हम उन टुकड़ों को आपस में बाँट लेंगे। इसके साथ ही नाना प्रकार के पेय तथा फूल-मालाएँ भी बड़ी मात्रा में मँगवा लेनी चाहिए।'॥43-44 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना  »  श्लोक 43-45h
 
 
श्लोक  5.24.43-45h 
ततस्त्वजामुखी नाम राक्षसी वाक्यमब्रवीत्॥ ४३॥
विशस्येमां तत: सर्वान् समान् कुरुत पिण्डकान्।
विभजाम तत: सर्वा विवादो मे न रोचते॥ ४४॥
पेयमानीयतां क्षिप्रं माल्यं च विविधं बहु।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राक्षसी अजामुखी बोली, 'मुझे व्यर्थ का विवाद पसंद नहीं। आओ, पहले हम इसके कई टुकड़े कर लें। सभी टुकड़े समान आकार और भार के होने चाहिए। फिर हम उन टुकड़ों को आपस में बाँट लेंगे। इसके साथ ही नाना प्रकार के पेय तथा फूल-मालाएँ भी बड़ी मात्रा में मँगवा लेनी चाहिए।'॥43-44 1/2॥
 
Thereafter the demoness Ajamukhi said, 'I do not like useless arguments. Come, let us first cut it into many pieces. All the pieces should be of equal size and weight. Then we will divide those pieces among ourselves. Along with this, various types of drinks and flowers and garlands should also be ordered in large quantities.'॥ 43-44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)