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ramayan 5.24.41-43h: तत्पश्चात् प्रघासा नामक राक्षसी बोली, "तो फिर हम इस क्रूर हृदया सीता का गला घोंट दें; अब चुप बैठने की क्या आवश्यकता है? इसे मारकर राजा को यह समाचार दें कि वह मानव कन्या मर गई है। इसमें संदेह नहीं कि यह समाचार सुनकर राजा तुम सब लोगों को आदेश देंगे कि तुम लोग उसे खा जाओ।" ॥41-42 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना  »  श्लोक 41-43h
 
 
श्लोक  5.24.41-43h 
ततस्तु प्रघसा नाम राक्षसी वाक्यमब्रवीत्॥ ४१॥
कण्ठमस्या नृशंसाया: पीडयाम: किमास्यते।
निवेद्यतां ततो राज्ञे मानुषी सा मृतेति ह॥ ४२॥
नात्र कश्चन संदेह: खादतेति स वक्ष्यति।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् प्रघासा नामक राक्षसी बोली, "तो फिर हम इस क्रूर हृदया सीता का गला घोंट दें; अब चुप बैठने की क्या आवश्यकता है? इसे मारकर राजा को यह समाचार दें कि वह मानव कन्या मर गई है। इसमें संदेह नहीं कि यह समाचार सुनकर राजा तुम सब लोगों को आदेश देंगे कि तुम लोग उसे खा जाओ।" ॥41-42 1/2॥
 
Thereafter a demoness named Praghasa spoke up, "Then let us strangle this cruel-hearted Sita; what is the need of sitting quietly now? After killing her, let us inform the king that the human girl has died. There is no doubt that on hearing this news, the king will order that all of you eat her up." ॥ 41-42 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)