Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.24.37-38h: महाराज रावण समस्त राक्षसों का पालन करने वाले स्वामी हैं। तुम्हें उन्हें अपना पति बनाना चाहिए। मैथिली! याद रखो, यदि तुम मेरी आज्ञा का ठीक से पालन नहीं करोगी, तो मैं तुम्हारा हृदय फाड़कर खा जाऊँगा।॥37 1/2॥ | ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
रावणं भज भर्तारं भर्तारं सर्वरक्षसाम्।
उत्पाटॺ वा ते हृदयं भक्षयिष्यामि मैथिलि॥ ३७॥
यदि मे व्याहृतं वाक्यं न यथावत् करिष्यसि।
अनुवाद
महाराज रावण समस्त राक्षसों का पालन करने वाले स्वामी हैं। तुम्हें उन्हें अपना पति बनाना चाहिए। मैथिली! याद रखो, यदि तुम मेरी आज्ञा का ठीक से पालन नहीं करोगी, तो मैं तुम्हारा हृदय फाड़कर खा जाऊँगा।॥37 1/2॥
‘Maharaj Ravana is the lord who provides for all the demons. You should make him your husband. Maithili! Remember, if you do not follow my instructions exactly, I will tear out your heart and eat it.’॥ 37 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥