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ramayan 5.24.32: मैथिली! यहाँ तो स्वयं इन्द्र भी तुम्हारी रक्षा नहीं कर सकेंगे। अतः मेरी बात सुनो, मैं तुम्हारे हित के लिए कुछ कह रहा हूँ॥ 32॥   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.24.32 
न त्वां शक्त: परित्रातुमपि साक्षात् पुरंदर:।
कुरुष्व हितवादिन्या वचनं मम मैथिलि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
मैथिली! यहाँ तो स्वयं इन्द्र भी तुम्हारी रक्षा नहीं कर सकेंगे। अतः मेरी बात सुनो, मैं तुम्हारे हित के लिए कुछ कह रहा हूँ॥ 32॥
 
Maithili! Even Indra himself will not be able to protect you here. So listen to me, I am telling you something for your benefit. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)