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ramayan 5.24.29: मिथिलेशाकुमारी, तुम्हारी बुद्धि बड़ी कुटिल है! अब तक हमने अपने कोमल स्वभाव के कारण तुम पर दया करके तुम्हारी बहुत सी अनुचित बातें सहन की हैं॥ 29॥   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.24.29 
बहून्यप्रतिरूपाणि वचनानि सुदुर्मते।
अनुक्रोशान्मृदुत्वाच्च सोढानि तव मैथिलि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
मिथिलेशाकुमारी, तुम्हारी बुद्धि बड़ी कुटिल है! अब तक हमने अपने कोमल स्वभाव के कारण तुम पर दया करके तुम्हारी बहुत सी अनुचित बातें सहन की हैं॥ 29॥
 
Mithileshakumari, you have a very crooked mind! Till now we have tolerated many of your inappropriate things because of our pity for you due to our gentle nature.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)