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ramayan 5.24.26: 'शोभने! अग्नि की प्रिय पत्नी स्वाहा और इंद्र की प्रिय शची के समान तुम रावण की प्रेयसी बनो। विदेहकुमारी! श्री राम दरिद्र हैं। उनकी आयु भी अब समाप्त हो गई है। उनसे तुम्हें क्या मिलेगा!॥26॥   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.24.26 
अग्ने: स्वाहा यथा देवी शची वेन्द्रस्य शोभने।
किं ते रामेण वैदेहि कृपणेन गतायुषा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'शोभने! अग्नि की प्रिय पत्नी स्वाहा और इंद्र की प्रिय शची के समान तुम रावण की प्रेयसी बनो। विदेहकुमारी! श्री राम दरिद्र हैं। उनकी आयु भी अब समाप्त हो गई है। उनसे तुम्हें क्या मिलेगा!॥26॥
 
‘Shobhane! Just like Agni's beloved wife Swaha and Indra's beloved Sachi, you become Ravana's lover. Videha Kumari! Shri Ram is poor. His life span is also over now. What will you get from him!॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)