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ramayan 5.24.25: हे विदेहराजकुमारी! आज से तुम समस्त लोकों की स्वामिनी बनो और दिव्य अंगराग और आभूषण धारण करो॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.24.25 
दिव्यांगरागा वैदेहि दिव्याभरणभूषिता।
अद्यप्रभृति लोकानां सर्वेषामीश्वरी भव॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे विदेहराजकुमारी! आज से तुम समस्त लोकों की स्वामिनी बनो और दिव्य अंगराग और आभूषण धारण करो॥ 25॥
 
O Princess of Videha! From today onwards you become the mistress of all the worlds and wear divine cosmetics and ornaments.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)