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ramayan 5.24.18: विशाललोचना वैदेही शोक के सागर में डूब गई थी। इसलिए वह वहाँ चुपचाप बैठी रही। किन्तु वे राक्षस वहाँ भी आ गए और उसे चारों ओर से घेर लिया॥18॥   |   ramayan सर्ग 5.24: सीताजी का राक्षसियों की बात मानने से इनकार कर देना तथा राक्षसियों का उन्हें मारने-काट ने की धमकी देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.24.18 
ततस्तां शिंशपां सीता राक्षसीभि: समावृता।
अभिगम्य विशालाक्षी तस्थौ शोकपरिप्लुता॥ १८॥
 
 
अनुवाद
विशाललोचना वैदेही शोक के सागर में डूब गई थी। इसलिए वह वहाँ चुपचाप बैठी रही। किन्तु वे राक्षस वहाँ भी आ गए और उसे चारों ओर से घेर लिया॥18॥
 
Vishallochana Vaidehi was drowned in the ocean of grief. Therefore she sat there quietly. But those demons came there too and surrounded her from all sides.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)