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ramayan 5.22.44: अशोकवाटिका से प्रस्थान करके दशग्रीव अपने महल में प्रविष्ट हुआ जो पृथ्वी को कम्पित करने वाले सूर्य के समान प्रकाशित हो रहा था ॥44॥   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.22.44 
प्रस्थित: स दशग्रीव: कम्पयन्निव मेदिनीम्।
ज्वलद्भास्करसंकाशं प्रविवेश निवेशनम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
अशोकवाटिका से प्रस्थान करके दशग्रीव अपने महल में प्रविष्ट हुआ जो पृथ्वी को कम्पित करने वाले सूर्य के समान प्रकाशित हो रहा था ॥44॥
 
Departing from the Ashokavatika, Dashagriva entered his palace which was illuminated like the bright sun, making the earth tremble. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)