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ramayan 5.22.42-43h: हे प्रिय! जो पुरुष ऐसी स्त्री की कामना करता है जो उससे प्रेम नहीं करती, उसे केवल शरीर में गर्मी का अनुभव होता है, और जो पुरुष ऐसी स्त्री की कामना करता है जो उससे प्रेम करती है, उसे परम सुख प्राप्त होता है।'   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  5.22.42-43h 
अकामां कामयानस्य शरीरमुपतप्यते॥ ४२॥
इच्छतीं कामयानस्य प्रीतिर्भवति शोभना।
 
 
अनुवाद
हे प्रिय! जो पुरुष ऐसी स्त्री की कामना करता है जो उससे प्रेम नहीं करती, उसे केवल शरीर में गर्मी का अनुभव होता है, और जो पुरुष ऐसी स्त्री की कामना करता है जो उससे प्रेम करती है, उसे परम सुख प्राप्त होता है।'
 
My dear one! A man who desires a woman who does not love him, only feels heat in his body, and a man who desires a woman who loves him, gets the ultimate happiness.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)