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ramayan 5.22.3: परंतु जैसे अच्छा सारथी घोड़ों को गलत मार्ग पर दौड़ने से रोक देता है, वैसे ही तुम्हारे प्रति मेरा जो प्रेम उत्पन्न हुआ है, वह मेरे क्रोध को रोक रहा है॥3॥   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.22.3 
संनियच्छति मे क्रोधं त्वयि काम: समुत्थित:।
द्रवतो मार्गमासाद्य हयानिव सुसारथि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
परंतु जैसे अच्छा सारथी घोड़ों को गलत मार्ग पर दौड़ने से रोक देता है, वैसे ही तुम्हारे प्रति मेरा जो प्रेम उत्पन्न हुआ है, वह मेरे क्रोध को रोक रहा है॥3॥
 
‘But just as a good charioteer stops horses from running on the wrong path, similarly the love that I have developed for you is stopping my anger.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)