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ramayan 5.22.29: नवीन तेज से युक्त होकर वे कल्पवृक्ष और वसन्त के स्वरूप के समान प्रतीत हो रहे थे। आभूषणों से विभूषित होने पर भी वे श्मशान के समान भयानक प्रतीत हो रहे थे।   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.22.29 
स कल्पवृक्षप्रतिमो वसन्त इव मूर्तिमान्।
श्मशानचैत्यप्रतिमो भूषितोऽपि भयंकर:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
नवीन तेज से युक्त होकर वे कल्पवृक्ष और वसन्त के स्वरूप के समान प्रतीत हो रहे थे। आभूषणों से विभूषित होने पर भी वे श्मशान के समान भयानक प्रतीत हो रहे थे।
 
Endowed with new splendour, he appeared like a wish-fulfilling tree and the embodiment of spring. Even after being adorned with ornaments, he appeared as terrifying as a crematorium* (temple built in a cremation ground).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)