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ramayan 5.22.27: राक्षसराज रावण, जो पर्वत के समान विशाल था, अपनी दोनों सुगठित भुजाओं से ऐसा शोभायमान हो रहा था, मानो मन्दराचल अपने दो शिखरों से सुशोभित हो।   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.22.27 
ताभ्यां स परिपूर्णाभ्यां भुजाभ्यां राक्षसेश्वर:।
शुशुभेऽचलसंकाश: शृंगाभ्यामिव मन्दर:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण, जो पर्वत के समान विशाल था, अपनी दोनों सुगठित भुजाओं से ऐसा शोभायमान हो रहा था, मानो मन्दराचल अपने दो शिखरों से सुशोभित हो।
 
The king of demons Ravana, who was as huge as a mountain, was looking as graceful with his two well-built arms as if Mount Mandara was adorned with its two peaks.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)