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ramayan 5.22.19: मैं धर्मात्मा श्री राम की पत्नी और राजा दशरथ की पुत्रवधू हूँ। हे पापी! मुझसे पापपूर्ण बातें बोलते समय तेरी जीभ क्यों नहीं पिघलती?॥19॥   |   ramayan सर्ग 5.22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 22: रावण का सीता को दो मास की अवधि देना, सीता का उसे फटकारना, फिर रावण का उन्हें धमकाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.22.19 
तस्य धर्मात्मन: पत्नी स्नुषा दशरथस्य च।
कथं व्याहरतो मां ते न जिह्वा पाप शीर्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
मैं धर्मात्मा श्री राम की पत्नी और राजा दशरथ की पुत्रवधू हूँ। हे पापी! मुझसे पापपूर्ण बातें बोलते समय तेरी जीभ क्यों नहीं पिघलती?॥19॥
 
‘I am the wife of the righteous Shri Ram and daughter-in-law of King Dasharath. O sinner! Why does your tongue not melt when you speak sinful things to me?॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)