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श्लोक 5.21.9  |
इह सन्तो न वा सन्ति सतो वा नानुवर्तसे।
यथा हि विपरीता ते बुद्धिराचारवर्जिता॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| क्या यहाँ पुण्यात्मा पुरुष नहीं रहते, अथवा यदि रहते भी हैं, तो तुम उनका अनुसरण नहीं करते? जिसके कारण तुम्हारी बुद्धि इतनी विकृत और पुण्यशून्य हो गई है?॥9॥ |
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| ‘Do the virtuous men not live here or even if they do, you do not follow them? Due to which your intellect has become so perverse and devoid of virtue?॥ 9॥ |
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