श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.21.9 
इह सन्तो न वा सन्ति सतो वा नानुवर्तसे।
यथा हि विपरीता ते बुद्धिराचारवर्जिता॥ ९॥
 
 
अनुवाद
क्या यहाँ पुण्यात्मा पुरुष नहीं रहते, अथवा यदि रहते भी हैं, तो तुम उनका अनुसरण नहीं करते? जिसके कारण तुम्हारी बुद्धि इतनी विकृत और पुण्यशून्य हो गई है?॥9॥
 
‘Do the virtuous men not live here or even if they do, you do not follow them? Due to which your intellect has become so perverse and devoid of virtue?॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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