श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.21.7 
साधु धर्ममवेक्षस्व साधु साधुव्रतं चर।
यथा तव तथान्येषां रक्ष्या दारा निशाचर॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘निश्चर! तुम्हें उत्तम धर्म की ओर देखना चाहिए और सत्पुरुषों के व्रतों का भली-भाँति पालन करना चाहिए। जैसे तुम्हारी स्त्रियाँ तुमसे रक्षा पाती हैं, वैसे ही तुम्हें दूसरों की स्त्रियों की भी रक्षा करनी चाहिए। ॥7॥
 
‘Nishchar! You should look towards the best religion and follow the vows of the good men properly. Just as your women get protection from you, in the same way you should protect the women of others as well. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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