Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.21.4: जैसे पापी पुरुष यश की कामना नहीं कर सकता, वैसे ही तुम भी मेरी कामना करने में समर्थ नहीं हो। मैं वह काम कभी नहीं कर सकता जो पतिव्रता स्त्री के लिए निंदित है॥4॥ | ramayan सर्ग 5.21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मां प्रार्थयितुं युक्तस्त्वं सिद्धिमिव पापकृत्।
अकार्यं न मया कार्यमेकपत्न्या विगर्हितम्॥ ४॥
अनुवाद
जैसे पापी पुरुष यश की कामना नहीं कर सकता, वैसे ही तुम भी मेरी कामना करने में समर्थ नहीं हो। मैं वह काम कभी नहीं कर सकता जो पतिव्रता स्त्री के लिए निंदित है॥4॥
‘Just as a sinful man cannot aspire for success, similarly you are not capable of desiring me. I can never do that which is condemned for a faithful wife.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥