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ramayan 5.21.34: तुम चाहे कुबेर के कैलाश पर्वत पर चले जाओ अथवा वरुण के दरबार में छिप जाओ, किन्तु जैसे मृत्यु द्वारा मारा गया विशाल वृक्ष वज्र से नष्ट हो जाता है, वैसे ही दशरथपुत्र श्रीराम के बाण से घायल होकर तुम भी तत्काल प्राण त्याग दोगे, इसमें संशय नहीं है; क्योंकि मृत्यु ने तुम्हें पहले ही मार डाला है।'   |   ramayan सर्ग 5.21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.21.34 
गिरिं कुबेरस्य गतोऽथवाऽऽलयं
सभां गतो वा वरुणस्य राज्ञ:।
असंशयं दाशरथेर्विमोक्ष्यसे
महाद्रुम: कालहतोऽशनेरिव॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तुम चाहे कुबेर के कैलाश पर्वत पर चले जाओ अथवा वरुण के दरबार में छिप जाओ, किन्तु जैसे मृत्यु द्वारा मारा गया विशाल वृक्ष वज्र से नष्ट हो जाता है, वैसे ही दशरथपुत्र श्रीराम के बाण से घायल होकर तुम भी तत्काल प्राण त्याग दोगे, इसमें संशय नहीं है; क्योंकि मृत्यु ने तुम्हें पहले ही मार डाला है।'
 
You may go to Kubera's mountain Kailash or hide yourself in Varuna's court, but just as a huge tree struck by death gets destroyed by a thunderbolt, similarly you will lose your life instantly when struck by the arrow of Dasharatha's son Shri Ram, there is no doubt about this; because death has already killed you.'
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे एकविंश: सर्ग:॥ २१॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें इक्कीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २१॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)