श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.21.31 
नहि गन्धमुपाघ्राय रामलक्ष्मणयोस्त्वया।
शक्यं संदर्शने स्थातुं शुना शार्दूलयोरिव॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तुम श्री राम और लक्ष्मण की गंध पाकर भी उनके सामने खड़े नहीं हो सकते। क्या कोई कुत्ता कभी दो बाघों के सामने खड़ा हो सकता है?॥31॥
 
‘You cannot stand before Shri Ram and Lakshman even after getting their scent. Can a dog ever stand before two tigers?॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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