श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.21.26 
रक्षांसि निहनिष्यन्त: पुर्यामस्यां न संशय:।
असम्पातं करिष्यन्ति पतन्त: कङ्कवासस:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे कंकपत्रों सहित बाण इस नगर के राक्षसों का नाश कर देंगे। वे ऐसी वर्षा करेंगे कि यहाँ तिल रखने के लिए भी स्थान नहीं बचेगा।॥ 26॥
 
‘There is no doubt that those arrows with Kankpatra (leaves of Kank leaves) will destroy the demons in this city. They will rain in such a way that there will be no space left here even to place a sesame seed.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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