श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.21.25 
इह शीघ्रं सुपर्वाणो ज्वलितास्या इवोरगा:।
इषवो निपतिष्यन्ति रामलक्ष्मणलक्षिता:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यहाँ श्री राम और लक्ष्मण के नाम से अंकित और सुन्दर गांठों वाले बाण शीघ्र ही प्रज्वलित मुख वाले सर्पों के समान गिर पड़ेंगे॥ 25॥
 
Here the arrows marked with the names of Sri Rama and Lakshmana and having beautiful knots will soon fall like serpents with blazing mouths.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)