श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.21.14 
एवं त्वां पापकर्माणं वक्ष्यन्ति निकृता जना:।
दिष्टॺैतद् व्यसनं प्राप्तो रौद्र इत्येव हर्षिता:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जिन लोगों को तुमने हानि पहुँचाई है, वे भी तुम्हें पापी कहेंगे और यह कहकर प्रसन्न होंगे कि, ‘अच्छा हुआ कि इस अत्याचारी को ऐसा कष्ट सहना पड़ा।’ ॥14॥
 
Similarly, the people whom you have harmed will call you a sinner and will rejoice saying, 'It is good that this tyrant had to suffer like this.' ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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