श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 21: सीताजी का रावण को समझाना और उसे श्रीराम के सामने नगण्य बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.21.13 
स्वकृतैर्हन्यमानस्य रावणादीर्घदर्शिन:।
अभिनन्दन्ति भूतानि विनाशे पापकर्मण:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
रावण! जब कोई अदूरदर्शी पापी अपने बुरे कर्मों के कारण मारा जाता है, उस समय उसके नाश पर समस्त प्राणी प्रसन्न होते हैं॥13॥
 
Ravana! When a short-sighted sinner is killed due to his evil deeds, at that time all creatures feel happy on his destruction. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)