श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 20: रावण का सीताजी को प्रलोभन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.20.7 
देवि नेह भयं कार्यं मयि विश्वसिहि प्रिये।
प्रणयस्व च तत्त्वेन मैवं भू: शोकलालसा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'देवी! इस विषय में तुम्हें डरना नहीं चाहिए। प्रिये! मुझ पर विश्वास करो और मुझे अपना सच्चा प्रेम दो। इस प्रकार दुःख से व्याकुल मत होओ।'
 
‘Devi! You should not be afraid in this matter. Dear! Trust me and give me your true love. Do not become distraught with grief like this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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