श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 20: रावण का सीताजी को प्रलोभन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.20.6 
एवं चैवमकामां त्वां न च स्प्रक्ष्यामि मैथिलि।
कामं काम: शरीरे मे यथाकामं प्रवर्तताम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मिथिलेशानंदिनी! इस अवस्था में भी मैं तुम्हें तब तक स्पर्श नहीं करूँगा जब तक तुम्हारी इच्छा न हो। भले ही कामदेव अपनी इच्छानुसार मेरे शरीर को कष्ट दें।
 
Mithileshanandini! Even in this condition, I will not touch you unless you desire me. Even if Kaamdev tortures my body as per his wish.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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