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श्लोक 6
श्लोक
5.20.6
एवं चैवमकामां त्वां न च स्प्रक्ष्यामि मैथिलि।
कामं काम: शरीरे मे यथाकामं प्रवर्तताम्॥ ६॥
अनुवाद
मिथिलेशानंदिनी! इस अवस्था में भी मैं तुम्हें तब तक स्पर्श नहीं करूँगा जब तक तुम्हारी इच्छा न हो। भले ही कामदेव अपनी इच्छानुसार मेरे शरीर को कष्ट दें।
Mithileshanandini! Even in this condition, I will not touch you unless you desire me. Even if Kaamdev tortures my body as per his wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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