Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.20.4: यहाँ तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं है। न तो मनुष्य आ सकते हैं और न ही इच्छानुसार कोई अन्य रूप धारण करने वाले राक्षस, केवल मैं ही आ सकता हूँ। परन्तु सीता! तुम्हें मुझसे जो भय है, वह दूर हो जाना चाहिए।॥4॥ | ramayan सर्ग 5.20: रावण का सीताजी को प्रलोभन । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नेह किञ्चिन्मनुष्या वा राक्षसा: कामरूपिण:।
व्यपसर्पतु ते सीते भयं मत्त: समुत्थितम्॥ ४॥
अनुवाद
यहाँ तुम्हें किसी प्रकार का भय नहीं है। न तो मनुष्य आ सकते हैं और न ही इच्छानुसार कोई अन्य रूप धारण करने वाले राक्षस, केवल मैं ही आ सकता हूँ। परन्तु सीता! तुम्हें मुझसे जो भय है, वह दूर हो जाना चाहिए।॥4॥
‘There is no fear for you here. Neither humans nor other demons who can take any form at will can come to this place, only I can come. But Sita! The fear you are having of me must go away. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥