श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 20: रावण का सीताजी को प्रलोभन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.20.3 
कामये त्वां विशालाक्षि बहु मन्यस्व मां प्रिये।
सर्वांगगुणसम्पन्ने सर्वलोकमनोहरे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'परन्तु विशाललोकने! मैं तुम्हें चाहता हूँ - मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। हे सम्पूर्ण जगत् के हृदय को मोह लेने वाली सुन्दरी! तुम भी मुझे विशेष आदर दो - मेरी प्रार्थना स्वीकार करो॥3॥
 
‘But Vishallokne! I want you – I love you. O beautiful woman who captivates the heart of the entire world! You too give me special respect – accept my request.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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