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श्लोक 5.20.3  |
कामये त्वां विशालाक्षि बहु मन्यस्व मां प्रिये।
सर्वांगगुणसम्पन्ने सर्वलोकमनोहरे॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| 'परन्तु विशाललोकने! मैं तुम्हें चाहता हूँ - मैं तुमसे प्रेम करता हूँ। हे सम्पूर्ण जगत् के हृदय को मोह लेने वाली सुन्दरी! तुम भी मुझे विशेष आदर दो - मेरी प्रार्थना स्वीकार करो॥3॥ |
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| ‘But Vishallokne! I want you – I love you. O beautiful woman who captivates the heart of the entire world! You too give me special respect – accept my request.॥ 3॥ |
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