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श्लोक 5.20.22  |
साधु पश्यामि ते रूपं सुयुक्तं प्रतिकर्मणा।
प्रतिकर्माभिसंयुक्ता दाक्षिण्येन वरानने॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| सुमुखी! आज मैं आपके श्रृंगार से विभूषित सुन्दर रूप को देख रहा हूँ। कृपया मुझ पर अपनी कृपा बरसाएँ और श्रृंगार से अलंकृत हों॥ 22॥ |
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| Sumukhi! Today I am looking at your beautiful form adorned with makeup. Please shower your generosity on me and adorn yourself with makeup.॥ 22॥ |
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