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श्लोक 5.20.17  |
लोकेभ्यो यानि रत्नानि सम्प्रमथ्याहृतानि मे।
तानि ते भीरु सर्वाणि राज्यं चैव ददामि ते॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| भीरु! मैं नाना लोकों से मंथन करके जो रत्न लाया हूँ, वे सब तुम्हारे होंगे और यह राज्य भी मैं तुम्हें सौंप दूँगा॥ 17॥ |
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| Bhiru! All the gems that I have brought from various worlds after churning them will be yours and I will hand over this kingdom to you.॥ 17॥ |
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