| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 20: रावण का सीताजी को प्रलोभन » श्लोक 15 |
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| | | | श्लोक 5.20.15  | यद् यत् पश्यामि ते गात्रं शीतांशुसदृशानने।
तस्मिंस्तस्मिन् पृथुश्रोणि चक्षुर्मम निबध्यते॥ १५॥ | | | | | | अनुवाद | | हे चन्द्रमा के समान मुख वाली सुमध्यमे! मैं आपके शरीर का जो भी भाग देखता हूँ, मेरी आँखें उसी में उलझ जाती हैं।॥15॥ | | | | O moon-like face Sumadhyme! Whichever part of your body I see, my eyes get entangled in it. ॥ 15॥ | | ✨ ai-generated | | |
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